जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे अमरेश को किसी फरिश्ते का है इंतजार

Dec 19, 2025 - 12:34
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जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे अमरेश को किसी फरिश्ते का है इंतजार

कुशीनगर के अमरेश की जिंदगी के लिए किसी फरिश्ते का इंतेजार

जनता का सहयोग नहीं मिला तो अमरेश की जिंदगी बचानी होगी मुश्किल 

न्यूज सेतु डेस्क कुशीनगर।

कुशीनगर जिले के पडरौना विधानसभा के ग्रामसभा चितहाँ निवासी अमरेश को उन 'फरिश्ते' का इंतजार है, जो उसका इलाज कराकर उसे नई जिंदगी की सौगात दे सकें। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले अमरेश 'कुछ दिनों पूर्व रोड एक्सीडेंट में गंभीर रुप से घायल हो गए है। घर के चिराग को बुझने से बचाने के लिए कुशीनगर जनपद के युवा सोसल मीडिया मुहीम के माध्यम से जनपद के लोगों से गुहार लगा रहे है। 7 महीना पहले अमरेश की शादी हुई थी, घर गांव क्षेत्र में अमरेश सबके प्रिय थे। एक्सीडेंट में गंभीर रुप से घायल होने के बाद जनसहयोग से कुशीनगर के युवाओं ने 4 लाख रूपये अब तक इकट्ठा कर लिया है लेकिन यह अमरेश के ईलाज के लिए पर्याप्त नहीं है। अमरेश के जीवन को बचाने के लिए लगभग उन्हें 1 महीने हॉस्पिटल में रहना पड़ेगा, प्रत्येक दिन लगभग 50 हजार रूपये का खर्च अमरेश के ईलाज मे आ रहा है। 10 दिनों से गोरखपुर के राजवंशी हॉस्पिटल मे एडमिट अमरेश के ईलाज मे जनसहयोग से इकट्ठा 5 लाख रुपये मे लगभग 4 लाख रुपये ईलाज मे लग चूका है.. परिवार की माली हालत इतनी खराब है की प्रत्येक दिन पेट की भूख खत्म करने के लिए भी परिवार को संघर्ष करना पड़ता है इस परिवार के पास कोई जमीन जायदात नहीं है जिसे बेचकर वह अमरेश का ईलाज कराये । गांव क्षेत्र के लोगों से बात करने के दौरान पता चला अमरेश बहुत ही समाजिक लड़का था, सभी के सुख दुःख मे हमेशा खड़ा रहता था, लेकिन भगवान ने उसके साथ ऐसा किया, यह क्षेत्र के लोगों को झकझोर दिया है, सर्व समाज के लोग अमरेश के जीवन के लिए प्रार्थना कर रहे है.. 

अमरेश के भरोसे ही परिवार का जीविकोपार्जन चलता था इस परिवार के पास आय का कोई दूसरा जरिया भी नहीं है। सोसल मीडिया के माध्यम से अमरेश के जीवन बचाने हेतू मुहीम चलाने वाले समाजसेवी हेमंत मिश्रा ने कुशीनगर जनपद के लोगो से मानवीय अपील की है और बताये हैं कि राजवंशी हॉस्पिटल के डॉक्टर पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अमरेश के जीवन बचाने की यह बड़ी लड़ाई सिर्फ दवाइयों से नहीं, जन संवेदना और सहयोग से भी लड़ी जानी है। अमरेश की शादी को अभी महज पांच महीने ही हुए हैं। नई-नई बसी गृहस्थी, सपनों से भरा भविष्य और परिवार की उम्मीदें, सब कुछ आज एक अनहोनी के साये में है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि करीब 10 लाख रुपये जैसे भारी इलाज खर्च को अकेले उठा सके। घर का चिराग बुझने की कगार पर है, एक पत्नी का सुहाग संकट में है। 

ऐसे समय में अगर हम सब थोड़ा-थोड़ा साथ दे दें तो यह बोझ हल्का हो सकता है। मदद बड़ी ही हो, यह जरूरी नहीं। 1000 रुपये नहीं तो 100 रुपये या अपनी सामर्थ्य के अनुसार जो भी संभव हो। जब कई हाथ मिलते हैं तो एक जिंदगी बचाई जा सकती है। मानवता के इस कठिन क्षण में आगे बढ़कर कुशीनगर के अमरेश के जीवन बचाने मे सहयोग करें। हमारी छोटी-सी आर्थिक सहायता अमरेश को फिर से स्वस्थ होकर हमारे बीच लौटने की उम्मीद दे सकती है! सोसल मीडिया के माध्यम से अमरेश के जीवन बचाने हेतू मुहीम चलाने वाले समाजसेवी हेमंत मिश्रा ने कुशीनगर जनपद के लोगो से मानवीय अपील की है और बताये है राजवंशी हॉस्पिटल के डॉक्टर पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अमरेश के जीवन बचाने की यह बड़ी लड़ाई सिर्फ दवाइयों से नहीं, जन संवेदना और सहयोग से भी लड़ी जानी है यदि सहयोग नहीं मिला तो शायद अमरेश का जीवन बचना मुश्किल है । अमरेश की शादी को अभी महज 7 महीने ही हुए हैं। नई-नई बसी गृहस्थी, सपनों से भरा भविष्य और परिवार की उम्मीदें, सब कुछ आज एक अनहोनी के साये में है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि करीब 10 लाख रुपये जैसे भारी इलाज खर्च को अकेले उठा सके। घर का चिराग बुझने की कगार पर है, एक पत्नी का सुहाग संकट में है। 

ऐसे समय में अगर हम सब थोड़ा-थोड़ा साथ दे दें तो यह बोझ हल्का हो सकता है। मदद बड़ी ही हो, यह जरूरी नहीं। 1000 रुपये नहीं तो 100 रुपये या अपनी सामर्थ्य के अनुसार जो भी संभव हो। जब कई हाथ मिलते हैं तो एक जिंदगी बचाई जा सकती है। मानवता के इस कठिन क्षण में आगे बढ़कर कुशीनगर के अमरेश के जीवन बचाने मे सहयोग करें। हमारी छोटी-सी आर्थिक सहायता अमरेश को फिर से स्वस्थ होकर हमारे बीच लौटने की उम्मीद दे सकती है!

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आफताब आलम अंसारी एडिटर इन चीफ न्यूज सेतु