विकसित भारत– रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती : प्रभारी मंत्री

Jan 11, 2026 - 11:14
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विकसित भारत– रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती : प्रभारी मंत्री
विकसित भारत– रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती : प्रभारी मंत्री

विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती : प्रभारी मंत्री

कुशीनगर।

जनपद के प्रभारी मंत्री एवं उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक को ग्रामीण भारत के लिए एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पुराने मनरेगा कानून की कमियों को दूर करते हुए ग्रामीण रोजगार, आय सुरक्षा और टिकाऊ अधोसंरचना को नई दिशा देगा।

प्रभारी मंत्री ने बताया कि नए विधेयक के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु के इच्छुक ग्रामीण सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जबकि पहले यह सीमा 100 दिनों की थी। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और उनकी आजीविका अधिक सुरक्षित बनेगी।

उन्होंने कहा कि नए कानून के अंतर्गत कार्यों को जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से जुड़े कार्य तथा जलवायु और मौसमी जोखिम कम करने वाले कार्यों की चार प्रमुख श्रेणियों में सीमित किया गया है, जिससे संसाधनों का बेहतर और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा। ग्राम पंचायतों द्वारा तैयार किए जाने वाले विकसित ग्राम पंचायत प्लान को अनिवार्य किया गया है, जिसे पीएम गति शक्ति जैसी राष्ट्रीय प्रणालियों से जोड़ा जाएगा।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि इस मिशन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, रोजगार और आय के अवसर बढ़ेंगे तथा गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण होगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन में कमी आएगी। किसानों को सिंचाई, जल संरक्षण, भंडारण और बाजार तक बेहतर संपर्क की सुविधाएं मिलेंगी, जबकि मजदूरों को 125 दिनों की रोजगार गारंटी के साथ लगभग 25 प्रतिशत अधिक संभावित आय प्राप्त होगी।

उन्होंने बताया कि मजदूरी का भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यम से आधार एवं बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए सीधे श्रमिकों के खातों में किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण रहेगा। समय पर कार्य उपलब्ध न होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा।

मनरेगा को नए स्वरूप में बदलने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए प्रभारी मंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 की परिस्थितियों के अनुसार बना कानून आज की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गया था। वर्तमान समय में गरीबी दर में कमी, बेहतर संपर्क सुविधाएं और डिजिटल पहुंच को देखते हुए अधिक प्रासंगिक, मजबूत और जवाबदेह रोजगार गारंटी व्यवस्था की आवश्यकता थी, जिसे यह नया विधेयक पूरा करता है।

वित्तीय व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह विधेयक राज्यों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालेगा। सामान्य राज्यों के लिए केंद्र-राज्य व्यय अनुपात 60:40 रहेगा, जबकि उत्तर-पूर्वी, हिमालयी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। आपदा की स्थिति में अतिरिक्त सहायता का भी प्रावधान रखा गया है।

प्रेसवार्ता के अंत में प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) गांव, किसान और मजदूर—तीनों के हितों का संतुलन बनाते हुए ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार साबित होगा।

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आफताब आलम अंसारी एडिटर इन चीफ न्यूज सेतु