बौद्ध धर्म के महान आचार्य भदंत ए. बी.ज्ञानेश्वर महास्थवीर का हुआ महापरिनिर्वाण
बौद्ध धर्म के महान आचार्य भदन्त ए.बी. ज्ञानेश्वर महास्थवीर का हुआ महापरिनिर्वाण
मोक्ष भूमि कुशीनगर आज एक बार पुनः हुई शोकाकुल
कुशीनगर/लखनऊ।
बौद्ध धर्म जगत से दुखद समाचार प्राप्त हुआ है। बौद्ध धर्म के प्रमुख गुरु और अखिल भारतीय भिक्षु संघ के अध्यक्ष अग्ग महापंडित भदन्त ए.बी. ज्ञानेश्वर महास्थवीर का शुक्रवार तड़के लखनऊ के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर फैलते ही भारत और म्यांमार सहित समस्त बौद्ध जगत में गहरा शोक छा गया।
जीवन की सरल परंतु प्रेरणादायी यात्रा
भदन्त ए.बी. ज्ञानेश्वर महास्थवीर का जन्म सन् 1936 में म्यांमार (वर्मा) में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा वहीं प्राप्त करने के बाद उन्होंने युवावस्था में ही बुद्ध के उपदेशों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया। सन् 1963 में वे भारत आए और बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर को अपनी तपोभूमि बनाया। सन् 1977 में उन्होंने भारत की नागरिकता ग्रहण की और तब से जीवनपर्यंत उन्होंने बौद्ध धर्म,भारतीय संस्कृति और मानवता की सेवा को अपना धर्म माना।
धर्म प्रचार और संघ की शक्ति
महास्थवीर ने बौद्ध भिक्षु संघ को संगठित और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे लंबे समय तक भिक्खु संघ के अध्यक्ष रहे। देश-विदेश में बौद्ध विहारों की स्थापना, शिक्षा संस्थानों का संचालन और युवा पीढ़ी को करुणा-मैत्री के संदेश से जोड़ने में उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित किया। उनकी वाणी में संयम और विचारों में अद्भुत स्पष्टता थी, जो हर धर्म-समाज के लोगों को प्रभावित करती थी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित
वर्ष 2021 में म्यांमार सरकार ने उन्हें अपने देश के सर्वोच्च धार्मिक सम्मान “अभिध्वजा महारथा गुरु” से सम्मानित किया। यह गौरव पाने वाले वे पहले भारतीय थे। यह सम्मान न केवल उनकी विद्वता और सेवा-भाव का प्रतीक था, बल्कि भारत-म्यांमार के धार्मिक संबंधों को भी और सुदृढ़ करने वाला क्षण था।
कुशीनगर में शोकसभा और श्रद्धांजलि
उनके निधन की सूचना मिलते ही कुशीनगर स्थित सभी बौद्ध विहारों में शोक की लहर दौड़ गई। देश-विदेश से श्रद्धालु, भिक्षु और अनुयायी लगातार कुशीनगर पहुंच रहे हैं। उनका पार्थिव शरीर आज शाम भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली स्थित म्यांमार बौद्ध विहार लाया जाएगा, जहां श्रद्धांजलि सभा और अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है।
एक युग का अंत, एक प्रेरणा की शुरुआत
भदन्त ए.बी. ज्ञानेश्वर महास्थवीर ने अपने जीवन से यह सिखाया कि सच्ची साधना सेवा में है, और सच्चा धर्म करुणा में। उनके विचार और कार्य भावी पीढ़ियों को मार्गदर्शन देते रहेंगे। बौद्ध समाज ने न केवल एक गुरु को खोया है, बल्कि एक ऐसे दार्शनिक को भी, जिसने धर्म को आधुनिक संदर्भों में जीने की प्रेरणा दी।
रिपोर्ट :
आफताब आलम अंसारी।
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