नहीं रहा अंग्रेजों के जमाने का जेलर,दिग्गज अभिनेता असरानी ने दुनियां को कहा अलविदा

Oct 21, 2025 - 10:29
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नहीं रहा अंग्रेजों के जमाने का जेलर,दिग्गज अभिनेता असरानी ने दुनियां को कहा अलविदा
नहीं रहा अंग्रेजों के जमाने का जेलर,दिग्गज अभिनेता असरानी ने दुनियां को कहा अलविदा

नहीं रहा अंग्रेजों के जमाने का जेलर, गोवर्धन असरानी ने दुनियां को कहा अलविदा 

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता असरानी का 84 वर्ष की आयु में निधन

मुम्बई/कुशीनगर।

हिंदी फिल्म जगत के प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक और कॉमेडी के पर्याय बन चुके गोवर्धन असरानी का आज 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे असरानी ने मंगलवार दोपहर लगभग 3 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरे फिल्म उद्योग में शोक की लहर दौड़ गई है।असरानी, जिन्हें दर्शक प्यार से “असरानी साहब” और “अंग्रेजों के जमाने के जेलर” के नाम से जानते हैं, ने अपने पांच दशक लंबे करियर में 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। 1970 के दशक में उन्होंने ‘मेरे अपने’, ‘कोशिश’, ‘बावर्ची’, ‘परिचय’, ‘अभिमान’, ‘चुपके-चुपके’, ‘छोटी सी बात’ और ‘रफू चक्कर’ जैसी सफल फिल्मों में अपनी कॉमिक टाइमिंग और अनोखे अंदाज से अहम पहचान बनाई।उनका सबसे यादगार किरदार फिल्म शोले में था, जिसमें उन्होंने जेलर का हास्यप्रद और व्यंग्यपूर्ण रोल निभाया। उनका यह पात्र आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार परफॉर्मेंसेज़ में गिना जाता है। दर्शकों के बीच असरानी की डायलॉग डिलीवरी और चेहरे के भावों ने हमेशा गहरी छाप छोड़ी।

मुख्य भूमिकाओं में भी असरानी ने अपनी प्रतिभा सिद्ध की। चला मुरारी हीरो बनने जैसी फिल्मों को उन्होंने न केवल लिखा और निर्देशित किया बल्कि उसमें अभिनय भी किया। इसके अलावा सलाम मेमसाब जैसी फिल्मों का निर्देशन कर उन्होंने बतौर फिल्ममेकर भी अपनी पहचान बनाई। गुजराती सिनेमा में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।उनके मैनेजर बाबूभाई थिबा ने जानकारी दी कि असरानी पिछले कुछ समय से बीमार थे। सांस संबंधी परेशानी के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनके फेफड़ों में पानी भर गया था। चिकित्सकों की देखरेख के बावजूद उनकी स्थिति बिगड़ती चली गई।परिवार की इच्छा के अनुसार असरानी का अंतिम संस्कार आज शाम मुंबई के सांताक्रूज़ श्मशान घाट पर किया गया। अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्य और कुछ करीबी मित्र शामिल हुए। बाबूभाई थिबा ने बताया, “असरानी साहब की इच्छा थी कि उनके निधन की खबर को निजी रखा जाए, इसलिए हमने इसे सार्वजनिक नहीं किया।”असरानी अपने पीछे पत्नी और परिवार को छोड़ गए हैं। हिंदी और गुजराती सिनेमा में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनके चाहने वालों और सहयोगियों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि असरानी की हंसी और उनका अद्भुत अभिनय हमेशा भारतीय सिनेमा का हिस्सा बना रहेगा।

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आफताब आलम अंसारी एडिटर इन चीफ न्यूज सेतु